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Uttarakhand in the refuge of the gods- आसमान से बरसेगी रहमत या मंदिर में होगी तपस्या? बर्फबारी के लिए देवताओं की शरण में उत्तराखंड का वाण गांव

चमोली – उत्तराखंड के पहाड़ इस बार मौसम की बेरुख़ी से जूझ रहे हैं। जनवरी का महीना बीतने को है, लेकिन न तो बर्फ की सफ़ेद चादर बिछी और न ही बादलों ने राहत की बूंदें बरसाईं। खेत सूख रहे हैं, जलस्रोत कमजोर पड़ रहे हैं और पहाड़ों की ठंडी हवा भी अब बर्फ की खुशबू नहीं ला पा रही। ऐसे में चमोली जिले के दूरस्थ वाण गांव के लोगों ने प्रकृति के साथ-साथ आस्था का भी दरवाज़ा खटखटाने का फैसला किया है।

नंदा देवी राजजात यात्रा के प्रमुख पड़ाव वाण में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया है कि वे देवताओं से बारिश और बर्फबारी की प्रार्थना करेंगे। गांव के लोगों ने मां नंदा देवी और लाटू देवता से एक सप्ताह के भीतर वर्षा और हिमपात की मन्नत मांगी है। यह सिर्फ एक प्रार्थना नहीं, बल्कि पूरे गांव की उम्मीदों और चिंता का प्रतीक बन गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड इस समय सूखे की मार झेल रहा है। पहाड़ों में लंबे समय से न बारिश हुई है और न ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ गिरी है। इसका असर खेती, पेयजल और प्राकृतिक संतुलन पर साफ दिखाई देने लगा है। इसी चिंता के बीच गांव वालों ने तय किया है कि अगर सात दिन के भीतर बादल नहीं बरसे, तो वे लाटू देवता के मंदिर में जाकर ध्यान-साधना करेंगे और वहीं तपस्या में लीन रहेंगे।

वाण गांव के सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह बिष्ट बताते हैं कि यह निर्णय आस्था और प्रकृति दोनों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उनका कहना है कि पहाड़ों में सूखा असामान्य स्थिति है और ऐसे समय में लोग अपने आराध्य देवताओं से गुहार लगाकर समाधान की उम्मीद करते हैं। उन्होंने बताया कि अगर एक हफ्ते में बारिश या बर्फबारी नहीं हुई, तो पूरा गांव मंदिर की शरण में जाएगा और तब तक साधना करेगा, जब तक देवता कृपा न कर दें।

ग्रामीणों को विश्वास है कि उनकी सामूहिक प्रार्थना खाली नहीं जाएगी। सदियों से पहाड़ों में ऐसी मान्यताएं रही हैं कि देवताओं की आराधना से मौसम भी करवट बदलता है। आज भी लोग इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आसमान उनकी पुकार सुनेगा।

इस बीच मौसम विभाग से कुछ राहत भरी खबर भी आई है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर के अनुसार, एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो चुका है जो जल्द ही उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों को प्रभावित कर सकता है। अनुमान है कि 12 हजार फीट से अधिक ऊंचे क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी के आसार बन रहे हैं। 22 जनवरी के बाद उत्तर भारत के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में मौसम बदल सकता है।

अब वाण गांव के लोग देवताओं की कृपा और मौसम के पूर्वानुमान — दोनों की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। देखना यह है कि पहले बादल बरसते हैं या गांव वाले तपस्या की राह पकड़ते हैं। लेकिन इतना तय है कि पहाड़ों की यह कहानी आस्था और प्रकृति के गहरे रिश्ते को एक बार फिर सामने ला रही है।

Uttarakhand in the refuge of the gods- आसमान से बरसेगी रहमत या मंदिर में होगी तपस्या? बर्फबारी के लिए देवताओं की शरण में उत्तराखंड का वाण गांव

One year of UCC – यूसीसी के

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