Zero Degree Temperature – जौनसार बावर में जीरो डिग्री तापमान से जनजीवन अस्त-व्यस्त, पानी की लाइनें तक जमी
चकराता (देहरादून)। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सर्दी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जौनसार बावर क्षेत्र के चकराता और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान लगातार माइनस में बना हुआ है। रात होते ही कड़ाके की ठंड पड़ रही है और पानी जमकर बर्फ बन जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि सुबह उठते ही लोगों को सबसे पहले जमे हुए पानी से जूझना पड़ रहा है। चकराता के कई गांवों में पेयजल लाइनें जम गई हैं, जिससे सुबह के समय पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है। जाड़ी गांव में इसका साफ असर देखने को मिला, जहां रात में पाइपलाइन से बहने वाला पानी पूरी तरह बर्फ में बदल गया।

लोगों को बाल्टियों में बर्फ तोड़कर पानी निकालना पड़ रहा है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह ठंड और ज्यादा परेशानी का कारण बन रही है। तेज ठंडी हवाओं और पाले ने जनजीवन को बेकाबू कर दिया है। दिन में धूप निकलने के बाद भी ठंड से राहत नहीं मिल पा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस दौरान बारिश या बर्फबारी हो जाती तो सूखी ठंड से कुछ राहत मिल सकती थी। बर्फ गिरने से खेतों और बागानों को भी फायदा होता और प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी बढ़ने की उम्मीद बनती। सबसे ज्यादा असर किसानों और पशुपालकों पर पड़ रहा है। ठंड के कारण घास और चारा जम गया है, जिससे पशुओं के लिए चारा जुटाना कठिन हो गया है। कई जगह रास्तों पर पाला जमने से फिसलन बढ़ गई है, जिससे आवाजाही भी मुश्किल हो रही है। पहाड़ी गांवों में लोग जरूरी काम के अलावा घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। स्थानीय लोग अब आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं और बारिश या बर्फबारी की उम्मीद कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे न केवल ठंड का असर थोड़ा कम होगा, बल्कि आने वाले महीनों के लिए पानी की समस्या से भी कुछ हद तक राहत मिल सकेगी। फिलहाल चकराता और आसपास के इलाकों में सर्दी अपने पूरे तेवर दिखा रही है और लोग इस कठिन मौसम से जूझने को मजबूर हैं।






