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चमोली के किमाणा गांव पर भूस्खलन का संकट, 20 परिवारों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा…

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में लगातार हो रही मूसलधार बारिश अब लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। ज्योतिर्मठ विकासखंड के किमाणा गांव में भारी वर्षा के कारण पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिससे गांव के करीब 20 परिवारों की जान और संपत्ति खतरे में पड़ गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि ग्रामीण हल्की बारिश होते ही सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हो रहे हैं।

गांव के ऊपरी हिस्से से शुरू हुआ भूस्खलन धीरे-धीरे रिहायशी इलाके तक पहुंच गया है। बारिश के साथ भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गांव की ओर आने लगे, जिससे कई खेत, खलिहान और नगदी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ भविष्य की खेती को लेकर भी चिंता सताने लगी है।

ग्राम प्रधान शशि देवी ने इस गंभीर स्थिति की जानकारी उपजिलाधिकारी ज्योतिर्मठ को पत्र के माध्यम से दी है। उन्होंने प्रशासन से गांव का तत्काल निरीक्षण कराने और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्राम प्रधान का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों के अनुसार, बीती रात तेज बारिश के बाद अचानक पहाड़ी से मलबे और विशाल बोल्डरों का बहाव शुरू हो गया। इससे कई आवासीय भवनों के आसपास खतरा बढ़ गया और कृषि भूमि को भी भारी क्षति पहुंची। लगातार बारिश के कारण लोगों में डर का माहौल बना हुआ है और वे हर पल अनहोनी की आशंका में जी रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ज्योतिर्मठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने राजस्व विभाग की टीम को तत्काल मौके पर भेजा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित क्षेत्र का विस्तृत सर्वे कर नुकसान का सही आकलन किया जाए और जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि राहत और सुरक्षा संबंधी आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

इधर लगातार बारिश का असर पूरे चमोली जिले में देखने को मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले कई संपर्क मार्ग मलबा आने से बाधित हो गए हैं। गुरुवार सुबह तक जिले के 15 ग्रामीण लिंक मार्ग बंद थे। प्रशासन और मशीनरी की मदद से दिनभर में आठ मार्गों को दोबारा खोल दिया गया, लेकिन सात संपर्क मार्ग अभी भी बंद हैं, जिससे ग्रामीणों को आवागमन और जरूरी सेवाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि राहत की बात यह रही कि बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पूरे दिन यातायात के लिए खुला रहा, जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को कुछ राहत मिली। प्रशासन लगातार मौसम पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा के बीच पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में किमाणा गांव का यह मामला प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जल्द राहत कार्य तेज होंगे और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।

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